जेवर बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा केंद्र, अश्विनी वैष्णव ने सोगड़ा से समझाई पीसीबी की जटिलता

जेवर के यमुना सिटी में शनिवार को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण परियोजनाओं का शिलान्यास किया. इन दोनों परियोजनाओं में करीब 6,750 करोड़ रुपये का निवेश होगा. सरकार के मुताबिक, इनसे लगभग 3,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है. इन निवेशों का उद्देश्य जेवर को देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्रों में शामिल करना है. सरकार का कहना है कि यह कदम भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम साबित होगा.
PCB और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का होगा निर्माण
नई परियोजनाओं के तहत ASCENT-K Circuit लगभग 3,250 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) निर्माण इकाई स्थापित करेगा. ये दक्षिण कोरिया की KCC के साथ एक संयुक्त उद्यम है. यहां हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर PCB का उत्पादन किया जाएगा, जिनका उपयोग आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है. वहीं, एम्बर एंटरप्राइजेज करीब 3,500 करोड़ रुपये का निवेश कर HVAC कंपोनेंट्स और PCB असेंबली बनाने की फैक्ट्री लगाएगी. इन इकाइयों के शुरू होने से देश में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए जरूरी पुर्जों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा.
‘असेंबली’ से आगे बढ़कर ‘डीप मैन्युफैक्चरिंग’ की ओर भारत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब केवल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके सबसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट भी देश में ही बनाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक में इस्तेमाल होने वाले 20 से 22 लेयर वाले उन्नत PCB अब भारत में तैयार होंगे. अब तक ऐसे कई उत्पाद विदेशों से आयात किए जाते थे, लेकिन नई फैक्ट्रियों के शुरू होने के बाद ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इनका निर्माण देश में होगा. इससे भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगी.
आयात घटेगा, विदेशी मुद्रा की होगी बचत
सरकार के अनुसार, भारत हर साल करीब 40,000 करोड़ रुपये मूल्य के PCB विदेशों से आयात करता है. यदि इनका निर्माण देश में होने लगेगा, तो आयात पर निर्भरता काफी कम हो सकती है. इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश के भुगतान संतुलन को भी मजबूती मिलेगी. सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारतीय उद्योग को नया बाजार मिलेगा और स्थानीय सप्लाई चेन भी मजबूत होगी. साथ ही, इससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा.
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से जेवर बनेगा निवेशकों की पहली पसंद
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जेवर आने वाले समय में उत्तर भारत का ‘सिलिकॉन वैली’ बन सकता है. उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र को वैश्विक निवेशकों के लिए और आकर्षक बना रही हैं. सरकार का मानना है कि मजबूत सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ बड़े औद्योगिक निवेश जेवर को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं. इससे न केवल उत्तर प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदलेगी, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी लंबे समय में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.



