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गंगा एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन की डेट फाइनल! मेरठ से प्रयागराज तक 120 KM की रफ्तार से फर्राटा भरेंगे वाहन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और कानपुर को जोड़ने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब अंतिम चरण में है. एनएचएआई के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह 63 किलोमीटर लंबा छह लेन वाला एक्सप्रेसवे दिसंबर 2025 के मध्य तक जनता के लिए खोल दिया जाएगा. निर्माण कार्य 99% पूरा हो चुका है, और केवल मामूली काम बाकी हैं. एक बार चालू होने के बाद यह एक्सप्रेसवे लखनऊ से कानपुर की यात्रा को मौजूदा 90 मिनट से घटाकर मात्र 35-45 मिनट में बदल देगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.

एक्सप्रेसवे लखनऊ के शहीद पथ से शुरू होकर कानपुर के आजाद चौक के पास गंगा ब्रिज तक जाता है. रास्ते में बानी, कंठा और अमरसास जैसे प्रमुख स्थान आते हैं. यह गंगा एक्सप्रेसवे से ऊना में जुड़ेगा, जिससे कानपुर बाईपास और लखनऊ रिंग रोड तक आसान पहुंच बनेगी. साथ ही, पांच टोल प्लाजा (मीरानपुर पिंवट, खंडेव, बानी, ललगंज और शुक्लागंज बाईपास) लगाए जाएंगे.

सुविधाएं: तीन बड़े ब्रिज, 28 छोटे ब्रिज, 38 अंडरपास, छह फ्लाईओवर और दो रेस्ट एरिया (मेडिकल सुविधाओं सहित) बनाए गए हैं. वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी/घंटा होगी.

एनएचएआई के रीजनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजीव शर्मा ने हालिया समीक्षा बैठक में बताया कि निर्माण 30 नवंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा, उसके बाद ट्रायल रन शुरू होंगे. उद्घाटन दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना है.

जनवरी 2026 के प्रारंभ तक खुलना निश्चित

हालांकि, बिजली लाइन के स्थानांतरण में देरी से 15 दिसंबर की मूल समयसीमा थोड़ी खिसक सकती है, लेकिन जनवरी 2026 के प्रारंभ तक निश्चित रूप से जनता के लिए खुल जाएगा.

एक्सप्रेसवे न केवल यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि कानपुर के चमड़े और टेक्सटाइल उद्योगों तथा लखनऊ के आईटी और पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करेगा. लगभग 41 गांवों को जोड़ने वाले इंटरचेंज से स्थानीय ट्रैफिक सुगम होगा. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे लॉजिस्टिक्स लागत 20-30% कम हो जाएगी, और रियल एस्टेट में भी उछाल आएगा.

पर्यटकों के लिए लखनऊ के ऐतिहासिक स्थलों से कानपुर के भोज और सैफई तक आसान पहुंच बनेगी. कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के ‘एक जिला एक उत्पाद’ अभियान को गति देगा. एनएचएआई का लक्ष्य 2026 तक सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे पूरे करना है.

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