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CGSH की अतिरिक्त निदेशक डॉ.नताशा और ड्राइवर अरेस्ट, ट्रांसफर के लिए रिश्वत लेने का आरोप

मेरठ। गाजियाबाद की सीबीआइ टीम ने सीजीएचएस (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) की अतिरिक्त निदेशक और निजी सहायक को 50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। 16 घंटे तक अतिरिक्त निदेशक के गंगानगर स्थित आवास और सूरजकुंड स्थित कार्यालय को सर्च किया गया।

सीबीआइ की टीम अतिरिक्त निदेशक और निजी सहायक के अलावा महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने साथ ले गई। गाजियाबाद की सीबीआइ कोर्ट में दोनों को पेश कर 14 दिनों के न्यायिक रिमांड पर डासना जेल भेज दिया।

टीपीनगर के गुप्ता कालोनी निवासी तरुण कुमार सीजीएचएस कार्यालय में जूनियर हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट (जेएचएए) पर पर कार्यरत था। फरवरी 2026 को अतिरिक्त निरीक्षक डा. नताशा वर्मा ने सीजीएचएस कार्यालय सूरजकुंड रोड से तरुण कुमार का स्थानांतरण मुरादाबाद कार्यालय में कर दिया था। परिवारिक कारणों की वजह से तरुण कुमार अपना स्थानांतरण वापस सूरजकुंड कार्यालय में करना चाहते थे।

तरुण का कहना है कि डा. नताशा वर्मा के कहने पर उनके निजी सहायक सनी कुमार ने 80 हजार रुपये की मांग की। डा. नताशा वर्मा और उनके निजी सहायक सनी से बातचीत की तरुण कुमार ने रिकार्डिंग कर ली। उसके बाद गुरुवार को सीबीआइ की गाजियाबाद ब्रांच के एसीबी से साक्ष्य के आधार पर मामले की शिकायत की गई।
अलीगढ़ के केला रोड निवासी डा. नताशा वर्मा और निजी सहायक सनी के खिलाफ सीबीआइ गाजियाबाद में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया।

उसके बाद दो कार में सवार होकर सीबीआइ की टीम तरुण कुमार को साथ लेकर सीजीएचएस के कार्यालय पहुंची। तरुण कुमार ने डा. नताशा वर्मा को लिफाफे में रखकर 50 हजार की नगदी दी। उन्होंने निजी सहायक सनी को उक्त नगदी का लिफाफा देने के लिए कह दिया। सनी के 50 हजार की नगदी से भरा लिफाफा पकड़ने पर सीबीआइ की टीम ने सनी और डा. नताशा वर्मा को हिरासत में ले लिया। उसके बाद 16 घंटे तक सीजीएचएस कार्यालय और उनके गंगानगर स्थित आवास पर सर्च किया गया।

काफी महत्पूर्ण कागजात सीबीआइ ने कब्जे में लिए। शुक्रवार की सुबह 11 बजे सीबीआइ की टीम मेरठ से नताशा और सनी को लेकर गाजियाबाद चली गई। वहां पर सीबीआइ कोर्ट में दोनों को पेश किया गया। अदालत ने डा. नताशा और सनी को 14 दिनों के रिमांड पर जेल भेज दिया। बता दें कि सात माह पहले ही डा. नताशा को अतिरिक्त निदेशक पद पर तैनाती दी गईं थी। वह मूलरूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं।

उनके पति नरेंद्र चौधरी की 2014 में हत्या हो चुकी है। उनकी हत्या में भी नताशा का गैरजमानती वारंट जारी हो चुका है। एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि सीबीआइ की टीम का स्थानीय पुलिस ने 16 घंटे के सर्च में सहयोग किया है।

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