उत्तर प्रदेशराज्‍य

रामलला के पुजारी बाल बढ़ाएंगे या मुंडन कराएंगे? धार्मिक समिति की पहली मीटिंग में तय हुए नियम-कानून

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर के पुजारियों के लिए नए नियम तय किए गए हैं। राम मंदिर धार्मिक न्यास समिति की बैठक में कई फैसले लिए गए हैं। पिछले दिनों श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में पूजा-पाठ से संबंधित मामलों को लेकर कई नियम-कानून तय किए गए हैं। पुजारियों के लिए नियम तय किया गया है कि वे अब अर्द्ध क्षौरकर्म नहीं करा सकेंगे। पुजारियों को या तो बाल बढ़ाने होंगे या पूरी तरह से मुंडन कराकर रखना होगा। भगवान की आरती के समय पुजारियों को सिर ढकना होगा।

क्यों लिया गया निर्णय?

रामलला के पुजारियों को लेकर लिए गए निर्णय को लेकर श्रीराम वल्लभकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रामलला के पुजारी सामान्य जन के रोल माडल है। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली में अनुशासन जरूरी है। वहीं, डॉ. रामानंद दास ने कहा कि बाल में पाप का स्थान है। इसलिए, परंपरा के अनुसार सिर ढककर आरती उतारी जानी चाहिए।

आचार्य मिथिलेश नंदिनी ने कहा कि पुजारी गण अर्द्ध क्षौरकर्म कराते हैं। यह अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुझे दूसरे देवस्थानों में यह शिकायत मिली है। वर्चुअल बैठक में स्वामी परमानंद महाराज, निर्मोही अखाड़ा महंत दिनेद्र दास, मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास, स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ और आचार्य इंद्रदेव मिश्र भी जुड़े।

विशेष भोग को लेकर भी निर्णय

रामलला के भोग को लेकर भी विशेष चर्चा की गई। सावन उत्सव के दौरान विशेष भोग की परंपरा है। रामकुंज कथा मंडप के पीठाधीश्वर डॉ. रामानंद दास ने बताया कि पूर्णिमा तक रोज देसी घी का मालपुआ और खीर प्रसाद का भोग लगता है। इस पर सभी संतों ने सहमति जताई। श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि इसके साथ अगले 15 दिनों तक पूड़ी-साग का भी भोग लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव को भी सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया।

झूलनोत्सव पर भी निर्णय

बैठक में राम मंदिर में पुजारियों की संख्या के लिहाज से ही रामलला और राम परिवार के साथ सभी उप मंदिरों में भी देवी-देवताओं के झूलन का निर्णय लिया गया। पुजारी प्रशिक्षण योजना के प्रभारी आचार्य केशव शर्मा ने बताया कि राम मंदिर में सुबह के समय भगवान को झूले पर विराजित कर झूलनोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान डबल पर्दा रहता है। संतों ने इसे उचित नहीं माना। उनका कहना था कि पुजारियों के लिहाज से उत्सव का समय तय होना चाहिए।

बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए निर्णय लिया गया कि श्रृंगार आरती के बाद रामलला मंदिर के गर्भगृह के बाहर विराजेंगे। इसके बाद दोपहर के विश्राम के बाद उन्हें शाम को झूले पर प्रतिष्ठित किया जाएगा। रामलला शयन आरती तक झूले पर ही रहेंगे। शाम के समय हर रोज मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।

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