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9 दशक पहले पर्दे पर श्रीराम बने थे रणबीर कपूर के परदादा पृथ्वीराज कपूर, सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल

इन दिनों बॉलीवुड गलियारों में नितेश तिवारी की आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर जबरदस्त चर्चा है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे हैं, जिसकी पहली झलक (लीक हुई तस्वीरों) ने फैंस के बीच खलबली मचा दी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रणबीर कपूर इस पौराणिक भूमिका को निभाने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य नहीं हैं? रणबीर से ठीक 92 साल पहले, उनके परदादा और भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले पृथ्वीराज कपूर ने बड़े पर्दे पर भगवान श्री राम का किरदार जीवंत किया था। यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि कपूर खानदान की अभिनय विरासत का एक सुनहरा चक्र है जो अब पूरा होने जा रहा है।

1934 की फिल्म ‘सीता’ और पृथ्वीराज कपूर

साल 1934 में एक फिल्म आई थी जिसका नाम था ‘सीता’। इस फिल्म का निर्देशन देबकी बोस ने किया था। उस दौर में तकनीक आज जैसी उन्नत नहीं थी, लेकिन पृथ्वीराज कपूर के ओजस्वी व्यक्तित्व और उनकी बुलंद आवाज ने उन्हें ‘राम’ के किरदार के लिए परफेक्ट बना दिया था।

* ऐतिहासिक महत्व: फिल्म ‘सीता’ भारतीय सिनेमा के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (वेनिस फिल्म फेस्टिवल) में प्रदर्शित होने वाली पहली भारतीय फिल्मों में से एक थी।

* परंपरा का निर्वाह: पृथ्वीराज कपूर के बाद अब उनकी चौथी पीढ़ी के वारिस रणबीर कपूर उसी दिव्य भूमिका को निभाने के लिए तैयार हैं। सोशल मीडिया पर फैंस पृथ्वीराज कपूर और रणबीर कपूर की तुलना कर रहे हैं और इसे ‘विरासत का हस्तांतरण’ बता रहे हैं।

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ का क्रेज

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ आधुनिक तकनीक, वीएफएक्स (VFX) और भारी बजट के साथ बनाई जा रही है। हाल ही में फिल्म के सेट से रणबीर कपूर और साई पल्लवी (सीता के रूप में) की कुछ तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिसमें रणबीर का लुक काफी शांत और गरिमापूर्ण नजर आ रहा है। “रणबीर कपूर ने इस रोल के लिए अपनी जीवनशैली में काफी बदलाव किए हैं, जिसमें मांसाहार और शराब का त्याग शामिल है, ताकि वे किरदार की पवित्रता को आत्मसात कर सकें।”

कपूर खानदान और पौराणिक फिल्में

कपूर परिवार का नाता हमेशा से ही ऐसी कहानियों से रहा है जो भारतीय जड़ों से जुड़ी हों। पृथ्वीराज कपूर ने न केवल ‘राम’ बल्कि ‘मुगल-ए-आजम’ में अकबर जैसे कालजयी किरदार निभाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। अब रणबीर कपूर के कंधे पर उस 92 साल पुरानी विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है।

1934 में पृथ्वीराज कपूर ने जिस गरिमा के साथ श्री राम का चित्रण किया था, आज के दर्शक रणबीर कपूर से भी वैसी ही उम्मीद कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आधुनिक सिनेमा के ‘राम’ यानी रणबीर कपूर अपने परदादा के उस ऐतिहासिक मानक को कैसे छू पाते हैं।

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