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थोक मंडियों में प्याज की कीमतों में 9% की गिरावट; जल्द मिलेगी आम जनता को राहत

प्याज की कीमतों में अब राहत मिलने की उम्मीद है, पिछले नौ दिनों में देश की मंडियों में प्याज की थोक कीमतों में करीब 9 फीसदी की गिरावट आई है. इससे उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है, जो पिछले कुछ हफ्तों से प्याज के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं.

मंगलवार को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.92 रुपये प्रति किलो थी. यह एक महीने पहले की तुलना में 48 फीसदी और एक साल पहले के मुकाबले 94 फीसदी ज्यादा है. उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि थोक कीमतों में गिरावट का असर जल्द ही खुदरा कीमतों पर भी दिख सकता है. उन्होंने कहा, “देश में प्याज की कोई कमी नहीं है. जब से सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए खुदरा बिक्री शुरू की है कि लोगों को प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से मिले, तब से इसे देश के करीब 48 शहरों तक पहुंचाया जा चुका है.”

उन्होंने बताया कि प्याज पहुंचाने के लिए ट्रकों के साथ-साथ दूसरे परिवहन साधनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. निधि खरे ने उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार मंडियों में प्याज की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है. थोक कीमतों में आई गिरावट से खुदरा कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है.

अगस्त में प्याज की महंगाई भी काफी बढ़ी. सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में प्याज की महंगाई दर बढ़कर 48.27 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 22.54 फीसदी थी.

सरकार 35 रुपये किलो में बेच रही प्याज

केंद्र सरकार ने पिछले महीने 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचना शुरू किया था. यह कीमत बाजार में चल रही कीमतों से कम है. प्याज एनसीसीएफ, नेफेड और केंद्रीय भंडार के खुदरा केंद्रों से बेचा जा रहा है. लोगों को राहत देने के लिए मोबाइल वैन के जरिए भी प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है.

सरकार ने प्याज के भंडार से एक तय मात्रा में प्याज बाजार में उतारना भी शुरू किया है. इसके लिए रेल और सड़क, दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है. रेल से प्याज भेजने वाली विशेष ट्रेनों को ‘कांदा एक्सप्रेस’ कहा जा रहा है. इसका मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और मौसम के कारण होने वाली कीमतों में तेजी को रोकना है.

सरकार के मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखे प्याज के भंडार को 24 अगस्त से नेफेड और एनसीसीएफ के जरिए बाजार में उतारना शुरू किया गया. इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ी और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिली. सरकार ने इस साल 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है.

इस समय प्याज की कीमतें क्यों बढ़ती हैं?

अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में आमतौर पर बढ़ोतरी देखने को मिलती है. इसके पीछे त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग, मौसम में बदलाव, सप्लाई में दिक्कत और मांग के बदलते पैटर्न जैसे कई कारण होते हैं. हालांकि हाल में प्याज महंगा हुआ है, लेकिन 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहा। यह पिछले साल के 307.67 लाख टन उत्पादन से केवल थोड़ा ही कम है.

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