उत्तर प्रदेशराज्‍य

यूपी सरकार में नए मंत्रियों को मिला पोर्टफोलियो, मनोज पांडेय को रसद और नागरिक आपूर्ति, जानिए किसे कौन सा विभाग मिला

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के 8वें दिन विभागों का बंटवारा हुआ है. आठ मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. भूपेन्द्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग दिया गया है, जबकि मनोज पाण्डेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी मिली है. अजीत सिंह पाल को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया है.

वहीं सोमेन्द्र तोमर को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में राजनैतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग दिया गया है. कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सुरेन्द्र दिलेर को राजस्व और हंस राज विश्वकर्मा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है.

साधा सामाजिक को क्षेत्रीय संगठन

विभागों के इस बंटवारे को सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

कैबिनेट बैठक कल

वहीं मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सोमवार (18 मई) को योगी आदित्यनाथ सरकार की पहली कैबिनेट बैठक होगी. 9.45 से 10.45 बजे तक होने वाली इस मीटिंग में नए मंत्री शामिल होंगे. वहीं अब जब नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो चुका तो सभी मंत्री सोमवार को होने वाली इस बैठक में तैयारी से जाएंगे.

मंत्रिमंडल विस्तार के 1 हफ्ते बाद विभागों का बंटवारा 

बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही सबसे ज्यादा नजरें विभागों के बंटवारे पर टिकी थीं, लेकिन करीब एक हफ्ते तक विभागों की घोषणा नहीं होने से अटकलों का दौर जारी रहा.

गौरतलब है कि बीते दिनों राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई. इनमें छह नए चेहरे शामिल रहे। मंत्रिमंडल विस्तार में दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री, दो को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और चार नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई.

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने शपथ ली. वहीं अन्य नेताओं को भी सरकार और संगठन के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी सौंपी गई. मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन को आगामी चुनावी रणनीति तथा सामाजिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. सरकार ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिश की है.

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