आबादी भूखंड पर ग्रेटर नोएडा के किसानों को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, फिर से दाखिल करेंगे याचिका

ग्रेटर नोएडा के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत सामने आई है। आबादी भूखंड की मांग को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के पक्ष में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनकी याचिका खारिज करने योग्य नहीं थी। अब किसानों को पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का अवसर मिल गया है, जिससे उनकी उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
चार प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग का मामला
दरअसल, किसानों ने चार प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक मंच) के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश प्रधान सिरसा के अनुसार, किसानों का तर्क था कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कुछ ऐसे किसानों को भी आबादी भूखंड आवंटित किए हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं किया था। इसी आधार पर अन्य किसानों को भी समान लाभ मिलना चाहिए।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिससे किसानों में निराशा फैल गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ किसानों ने अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि किसान अपने मामले को दोबारा मजबूती से हाई कोर्ट में रख सकते हैं और प्राधिकरण को दिए गए अपने प्रत्यावेदन के आधार पर पुनः सुनवाई की मांग कर सकते हैं।
सभी प्रभावित किसानों को मिले समान अधिकार
प्रकाश प्रधान सिरसा और संगठन के विधि प्रकोष्ठ के कानूनी सलाहकार विनोद कुमार वर्मा (खैरपुर गुर्जर) ने कहा कि अधिसूचित क्षेत्र के सभी प्रभावित किसानों को चार प्रतिशत आबादी भूखंड मिलना चाहिए। उनका कहना है कि पहले भी प्राधिकरण ने ऐसे किसानों को भूखंड दिए हैं, जो गजराज याचिका का हिस्सा नहीं थे, इसलिए बाकी किसानों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
किसानों ने संघर्ष जारी रखने का दिया संकेत
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी कीमत पर किसानों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं होने देंगे। यदि आवश्यकता पड़ी, तो वे किसानों के साथ लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात भी करेंगे और अपनी मांग को मजबूती से रखेंगे।



