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नोएडा में पर्थला और FNG पर खत्म होगा जाम, 80 करोड़ से बनेगा 6 लेन का अंडरपास; 7 दिन में आएगी DPR

नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा के पर्थला चौक और एफएनजी कॉरिडोर पर प्रतिदिन होने वाले भीषण जाम से निजात पाने की उम्मीद जगी है। सिग्नेचर ब्रिज के नीचे 6 लेन वाला अंडरपास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अगले सप्ताह नोएडा प्राधिकरण को प्राप्त होने की संभावना है।

रिपोर्ट मिलने के बाद इसे बोर्ड के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रस्तावित अंडरपास निर्माण पर लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। नोएडा प्राधिकरण ने इसका डिजाइन तैयार कर जारी कर दिया है, जिसकी तकनीकी जांच इस समय IIT दिल्ली से कराई जा रही है।

710 मीटर लंबा होगा अंडरपास

जांच के बाद परियोजना की वास्तविक लागत निर्धारित होगी और इसके बाद मिट्टी परीक्षण सहित निर्माण से जुड़ी अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। यह अंडरपास लगभग 710 मीटर लंबा होगा और इसमें दोनों ओर तीन-तीन लेन का प्रावधान रखा गया है। योजना के अनुसार, 110 मीटर लंबा RCC बॉक्स, 20 मीटर का खुला हिस्सा और दोनों छोर पर 280-280 मीटर लंबे पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे।

गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे जाने वाले निकलते हैं

बारिश के दौरान जलभराव से बचाव के लिए पंपिंग सिस्टम की व्यवस्था भी की जाएगी। निर्माण कार्य में डायफ्राम वॉल तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे खुदाई के समय आसपास की जमीन और पहले से मौजूद ढांचे पर प्रतिकूल असर न हो और वे सुरक्षित रहें। पर्थला चौक एफएनजी कॉरिडोर और विकास मार्ग का महत्वपूर्ण जंक्शन है। यहां से गाजियाबाद, एनएच-9, मेरठ एक्सप्रेसवे, नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की दिशा में जाने वाले वाहन निकलते हैं।

लोगों को बड़ी राहत मिलेगी

आने वाले समय में फरीदाबाद से सीधा संपर्क बढ़ने के बाद इस मार्ग का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। वर्तमान में सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में यहां वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अंडरपास बनने के बाद यातायात के दबाव में कमी आने और वाहनों के प्रवाह को सुगम बनाने की उम्मीद है। अंडरपास बनने के बाद सेक्टर-66, 71, 121, 122, छिजारसी और किसान चौक के निकटवर्ती इलाकों के निवासियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

आवाजाही सुगम होगी

इससे एफएनजी कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही सुगम होने के साथ ही यात्रा में लगने वाला समय भी घटने और सड़क सुरक्षा में सुधार आने की संभावना है। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 18 महीने की अवधि निर्धारित की गई है। इस समय DPR प्राप्त होना, डिजाइन की तकनीकी जांच और बोर्ड से स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। इसके बाद टेंडर जारी होने के साथ ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

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