अंतर्राष्ट्रीय

हमास ने जिंदा बचे सभी 20 इजराइली बंधकों को रिहा किया, डोनाल्ड ट्रंप तेल अवीव पहुंचे

दो साल से इजरायल-हमास के युद्ध में जो कत्ल-ए-आम मचा, उसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया. हमास ने इसकी शुरुआत की और इजरायल ने अंत, लेकिन जान दोनों ही तरफ के मासूम नागरिकों की गई. हमास के क्रूर हमले में 7 अक्तूबर को जिन इजरायली नागरिकों को बंधक के तौर पर ले जाया गया, उनमें से कुछ अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहे थे. उन्हें भी शायद उम्मीद खत्म होती नजर आई हुई होगी, जब दोनों पक्षों ने युद्धविराम माना और वे सही-सलामत अपने घर लौटे.

सोमवार को इज़राइल में खुशी और राहत की लहर दौड़ गई, जब हमास ने रिहा किए गए 20 इज़राइली बंधकों को आधिकारिक तौर पर इज़राइल रक्षा बलों के हवाले कर दिया गया. यह पल अमेरिका के समर्थन वाले युद्धविराम और बंदियों को लौटाने के समझौते के तहत एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका मकसद दो साल से जारी संघर्ष को समाप्त करना है. बंधकों की सुरक्षित वापसी की खबर पूरे देश में गहरी भावनाएं जगा गई.

ये ऐतिहासिक पल था …

हजारों लोग राजधानी तेल अवीव के होस्टेजेस स्क्वायर में जमा हुए. वे इजराइली झंडे लहरा रहे थे और IDF की ओर से रिहा किए गए बंधकों के इजरायल को सौंपे जाने की बात सुनकर खुशी से झूम उठे. भीड़ में कई लोग बंधकों के नाम सुनकर रो पड़े क्योंकि उनके लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा. बंधकों को हमास ने गाजा में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के प्रतिनिधियों को सौंपा, जिन्होंने उन्हें इजराइली सेना को सौंपा. इसके बाद बंधकों को तेल अवीव के पास मेडिकल सुविधाओं में ले जाया गया, जहां उनकी जांच हुई और वे अपने परिवारों से मिले. करीब 20 जिंदा इजराइली बंधकों की रिहाई के बदले, इजराइल ने लगभग 2000 फ़िलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया है.

फिर वापस लौटेगी जिंदगी …

इजरायल पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने इस सफल रिहाई को शांति और मानवता की जीत बताया. यह युद्ध विराम उनके 20 प्वाइंट की शांति योजना के पहले चरण का हिस्सा है, जो पिछले सप्ताह मिस्र में इज़राइल और हमास के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत के जरिए कतर और तुर्की की मध्यस्थता में तय हुई. समझौते में गाजा के भूखे और बंद इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचाने की भी योजना शामिल है, ताकि 2 साल से संघर्ष और नाकेबंदी के बाद वहां के लोगों को जरूरी राहत मिल सके. इज़राइल में अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी पर खुशी है.

इससे भावुक पल क्या होगा?

इजरायली बंधक और दो बच्चों के पिता ओमरी मीरन भी छूटने वालों में से एक हैं. उन्होंने जब इतने दिनों बाद अपनी 4 और 2 साल की बेटी से बात की, तो ये बेहद भावुक पल था. उनकी छोटी बेटी सिर्फ 6 महीने की थी, जब उसके पिता को हमास ने बंधक बना लिया था. एक मां ने अपने बेटे के लौटने का नाम सुनकर ही जो कहा, वो किसी की भी आंखों में आंसू ला दे. ये ऐसी कहानियां और पल हैं, जो शब्दों में बयां नहीं हो सकते क्योंकि इसके पीछे न जाने कितना दर्द छिपा है.

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