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रामलला दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव… अब पोर्टल से नहीं होगी विशिष्ट बुकिंग; जानें क्या है नया नियम?

अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट और दर्शन व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य दर्शन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और सभी के लिए समान बनाना है।

यहाँ इन बदलावों की विस्तृत जानकारी दी गई है:-

‘विशिष्ट दर्शन’ की श्रेणी समाप्त

ट्रस्ट ने वीआईपी कल्चर को कम करने और सामान्य भक्तों को प्राथमिकता देने के लिए ऑनलाइन बुकिंग से ‘विशिष्ट दर्शन’ का विकल्प पूरी तरह हटा दिया है। अब वेबसाइट पर श्रद्धालुओं को केवल दो ही विकल्प दिखाई देंगे:

इस कदम से अब सभी श्रद्धालुओं को एक ही श्रेणी के अंतर्गत दर्शन की सुविधा मिलेगी, जिससे दर्शन व्यवस्था में समानता आएगी।

दर्शन के प्रकार और मिलने वाली सुविधाएँ

नए नियमों के अनुसार, अलग-अलग पास पर दर्शन का दायरा भी तय किया गया है: सुगम दर्शन पास: इस पास के जरिए श्रद्धालु मुख्य रूप से प्रभु रामलला और राम परिवार के दर्शन कर सकेंगे। सामान्य दर्शन पास: यह पास अधिक विस्तृत दर्शन की सुविधा देता है। इसके अंतर्गत श्रद्धालु रामलला और राम परिवार के साथ-साथ सप्तमंडपम और ऐतिहासिक कुबेर टीला के भी दर्शन कर पाएंगे।

श्रद्धालुओं की संख्या में बदलाव

ट्रस्ट ने एक पास पर साथ जाने वाले सदस्यों की संख्या को भी संशोधित किया है।

पहले ‘सुगम दर्शन पास’ पर एक साथ 8 श्रद्धालु दर्शन कर सकते थे।

अब नई व्यवस्था के तहत, एक पास पर अधिकतम 5 श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

यह निर्णय मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है।

भारी बुकिंग और पारदर्शिता

राम मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वेबसाइट पर 30 तारीख तक के सभी स्लॉट पहले ही फुल हो चुके हैं। ट्रस्ट का मानना है कि ऑनलाइन पंजीकरण की इस नई और सरल प्रक्रिया से बिचौलियों पर लगाम लगेगी और भक्तों को सीधे बिना किसी परेशानी के दर्शन प्राप्त होंगे।

यदि आप भी अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करना चाहते हैं, तो ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर समय रहते अपना पंजीकरण कर लें। सुगम और सामान्य दर्शन की इस नई व्यवस्था से अब हर भक्त को सुव्यवस्थित तरीके से प्रभु के चरणों में शीश नवाने का अवसर मिलेगा।

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