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हत्या या खुदकुशी? हॉस्पिटल में नाइट ड्यूटी पर तैनात शख्स का शव मिला, परिजनों ने लगाए ये आरोप

कानपुर । नौबस्ता थानाक्षेत्र के रायल चिल्ड्रेन हास्पिटल के कर्मचारी ने नशे की लत पूरा करने के लिए इंजेक्शन का ओवरडोज ले लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। सुकोल नाम का यह इंजेक्शन आपरेशन से पहले एनेस्थीसिया के साथ दिया जाता है।

यह मांसपेशियों की अकड़न दूर करने में मदद करता है। हास्पिटल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच-पड़ताल कर साक्ष्य जुटाकर स्वजन को सूचना दी। युवक फतेहपुर के जाफरगंज कमासी का रहने वाला था। हालांकि, स्वजन ने अस्पताल प्रबंधन पर कोई आरोप नहीं लगाया है।

फतेहपुर के जाफरगंज कमासी निवासी 27 वर्षीय संतोष कुमार सिंह चकेरी के शिवकटरा में रहकर किदवई नगर वाइ ब्लाक स्थित रायल चिल्ड्रेन हास्पिटल में नर्सिंग स्टाफ की नौकरी करता था। परिवार में मां निर्मला, बड़े भाई सुधीर किसान और मझले भाई अनिल फिजियोथेरेपिस्ट हैं। रविवार सुबह करीब आठ बजे संतोष का शव हास्पिटल के चेजिंग रूम में मिला।

शव के पास ही सुकाल इंजेक्शन के वायल भी पड़े हुए थे। हास्पिटल प्रबंधन ने घटना की जानकारी नौबस्ता पुलिस को दी। फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। बताया जा रहा है कि संतोष ने खुद को दो इंजेक्शन लगाए थे, जो ओवरडोज था।

इससे वह बेसुध हो गया और उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर स्वजन मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि स्वजन ने हास्पिटल प्रबंधन पर कोई आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने कोई तहरीर नहीं दी है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने के चलते हार्ट, फेफड़े और पाचन तंत्र को विसरे के रूप में रखा गया है।

आपरेशन से पहले दिया जाता है सुकोल इंजेक्शन

सुकोल इंजेक्शन का उपयोग सामान्य एनेस्थीसिया के साथ आपरेशन के दौरान मांसपेशियों को आराम पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग आइसीयू में भर्ती मरीजों में किया जाता है। यह इंजेक्शन मांसपेशियों की अकड़न या ऐंठन में भी राहत देता है। यह इंजेक्शन बिना डाक्टर के पर्चे के नहीं मिलता है। इसके ओवरडोज से किसी व्यक्ति की जान भी जा सकती है।

अस्पताल प्रबंधन बोला- नशे का लती था कर्मचारी, नहीं थी जानकारी

रायल चिल्ड्रेन हास्पिटल के एचआर मैनेजर विकास श्रीवास्तव ने बताया कि संतोष दो साल से हास्पिटल में नर्सिंग स्टाफ के रूप में काम कर रहा था। उसकी मौत के बाद हास्पिटल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने बताया कि वह नशे का लती था और रोज खुद को इंजेक्शन लगाता था। हालांकि, उन्होंने कभी इसकी चर्चा नहीं की। संतोष के स्वजन को भी इसकी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने भी कभी इसके बारे में नहीं बताया।

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