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आजम खान को झटका: शत्रु संपत्ति के 3 केसों को एक करने की अर्जी खारिज, अब अलग-अलग चलेगी सुनवाई

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी नेता आजम खान को बड़ा झटका दिया है। आजम खान की ओर से शत्रु संपत्ति के तीन मुकदमों को एक करने की अर्जी दायर की गई थी। इस अर्जी पर कोर्ट ने शनिवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने आजम खान की अर्जी निरस्त करते हुए तीनों मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। तीनों मामलों की सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख निर्धारित की गई है। दरअसल, आजम खान के खिलाफ कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में 9 मई 2020 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें पहले लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद और अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।

जौहर यूनिवर्सिटी पास थी जमीन

मामला आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास की शत्रु संपत्ति से जुड़ा हुआ है। यह जमीन इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी। इमामुद्दीन कुरैशी विभाजन के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। वर्ष 2006 में यह संपत्ति शत्रु संपत्ति के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज की गई। भूमि रिकार्ड की जांच में सामने आया कि राजस्व विभाग के रिकार्ड में फर्जीवाड़ा कर शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के लिए आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व रिकार्ड में अंकित कर दिया गया। रिकार्ड के पन्ने फटे हुए मिले थे।

मामले में ये बनाए गए आरोपी

शत्रु संपत्ति के इस मामले में पूर्व मंत्री आजम खान, उनकी पत्नी पूर्व सांसद डा. तजीन फात्मा और उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम समेत जौहर ट्रस्ट के अन्य सदस्य आरोपी बनाए गए। ट्रस्ट में अधिकतर सदस्य आजम खान के परिवार से हैं। इस केस में रिटायर्ड कलक्ट्रेट कर्मचारी भगवंत भी आरोपी हैं। वह अब सरकारी गवाह बन चुके हैं। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में अग्रिम जांच की थी।

पुलिस ने जांच के बाद आजम खान पर मुकदमे में आइपीसी की तीन धाराएं 467, 471 और 201 बढ़ाते हुए पूरक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल किया था। इन बढ़ी हुई धाराओं में आजम खान की जमानत अर्जी भी खारिज हो चुकी है।

दो अन्य केस दर्ज

आजम खान के खिलाफ इसके अलावा शत्रु संपत्ति के दो केस वर्ष 2019 में दर्ज हुए थे। ये केस अजीमनगर थाने और शहर कोतवाली में दर्ज हैं। तीनों केसों की सुनवाई एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में चल रही है। आजम खान की ओर से तीनों मुकदमों को एक करने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया था। आजम के वकील का कहना था कि तीनों मुकदमों में विवादित संपत्ति एक है। मामले में अधिकांश अभियुक्त भी एक हैं। दस्तावेज भी लगभग एक है। गवाह भी कमोबेश एक हैं।

हालांकि, आजम खान के प्रार्थना पत्र पर अभियोजन की ओर से आपत्ति दाखिल की गई थी। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राकेश मौर्य ने दलील दी कि तीनों प्रकरण अलग हैं। इनकी अलग-अलग सुनवाई होनी चाहिए। इसके बाद एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट के जज शोभित बंसल ने आजम खान का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। उन्होंने तीनों मुकदमों की अलग-अलग सुनवाई के आदेश दिए।

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