ग्रेटर नोएडा बस हादसा: मां को बचाने में इंजीनियर बेटे ने गंवा दी जान, अग्निकांड में मरने वाले सभी नौ की पहचान

नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात स्लीपर बस में लगी आग ने महोबा के एक परिवार से मां-बेटे को छीन लिया। हादसे में सुनीता गुप्ता और उनके बेटे शशांक गुप्ता की मौत हो गई।
पैर में दर्द के चलते बाहर नहीं निकल पा रही थी मां
जानकारी के अनुसार, सुनीता पैर में दर्द के कारण बस से बाहर नहीं निकल पा रही थीं। चालक ने शशांक से अकेले बाहर निकलकर जान बचाने को कहा, लेकिन उन्होंने मां का हाथ छोड़ने से इनकार कर दिया। मां ने भी बेटे से अपनी जान बचाकर बाहर निकलने को कहा, लेकिन वह उन्हें बचाने की कोशिश में खुद भी आग की चपेट में आ गया। आग बुझने के बाद दोनों के शव एक साथ मिले।
एयरलाइंस कंपनी में इंजीनियर थे शशांक
शुक्रवार को परिजनों ने शशांक और उनकी मां की पहचान की। शशांक गुड़गांव की एक एयरलाइंस कंपनी में इंजीनियर थे। उनके पिता नीरज गुप्ता महोबा में बीजेपी के कोषाध्यक्ष हैं। परिवार ने शशांक की अंगूठी और अन्य पहचान चिह्नों के आधार पर दोनों शवों की पहचान की।
हर 15 दिन में दिल्ली आते थे मयंक गुप्ता
वहीं, हमीरपुर के राठ क्षेत्र के मयंक गुप्ता और उनकी रिलेटिव सरोज गुप्ता की भी इस हादसे में मौत हुई है। शुक्रवार सुबह मयंक गुप्ता और सरोज के शव घर पहुंचे तो स्वजन और मोहल्लेवासियों में चीख पुकार मच गई। मयंक गुप्ता दिल्ली की एक निजी कंपनी में इंजीनियर थे और घर से ही कंपनी का काम करते थे।
पोस्टमॉर्टम हाउस पर लगी रही भीड़
15 दिन में एक बार उन्हें दिल्ली स्थित कंपनी के दफ्तर जाना होता था। मयंक बुधवार रात दिल्ली से राठ लौटने के लिए राज कल्पना ट्रैवल्स की बस में सवार हुए थे। सरोज गुप्ता हमीरपुर के जलालपुर एरिया की ममना गांव की रहने वाली थीं। मयंक और सरोज दोनों आपस में रिश्तेदार थे। वहीं, शुक्रवार को भी पोस्टमॉर्टम हाउस पर शवों की पहचान के लिए भीड़ लगी रही।



