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घूसखोर टाइटल विवाद: विरोध के चलते इन फिल्मों को बदलने पड़े थे नाम, अब मनोज वाजपेयी की फिल्म का क्या होगा?

आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर रिलीज होते ही विवादों में घिर गया है. सोशल मीडिया पर टीजर सामने आते ही कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने फिल्म के नाम पर आपत्ति जताई और इसे एक समुदाय की छवि खराब करने वाला बताया. विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गई है जिसके बाद ये मामला और तूल पकड़ता नजर आया पर अभी तक ना तो निर्माता नीरज पांडे की तरफ से और ना ही ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है .

टाइटल को लेकर फिल्म जगत में क्या है कानून?

फिल्म इंडस्ट्री में आम तौर पर किसी भी फिल्म का नाम रखने से पहले यह देखा जाता है कि वह नाम किसी फिल्म एसोसिएशन के पास पहले से रजिस्टर तो नहीं है. अगर नाम पहले से मौजूद होता है तो निर्माता दूसरा नाम चुनते हैं या कई विकल्प रखते हैं. लेकिन ‘घूसखोर पंडत’ के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. विवाद खड़ा होने के बाद जब यह पता करने की कोशिश की गई कि यह टाइटल किस एसोसिएशन के पास रजिस्टर है, तो मालूम हुआ कि यह नाम किसी भी फिल्म एसोसिएशन के साथ रजिस्टर ही नहीं कराया गया था.

फिल्म मेकर्स कंबाइन (FMC) के पत्रों से खुला मामला

इस बीच फिल्म मेकर्स कॉम्बाइन (FMC) की ओर से दो अलग-अलग पत्र सामने आए हैं. एक पत्र नेटफ्लिक्स को भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि ‘घूसखोर पंडत’ टाइटल किसी भी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन से स्वीकृत नहीं है और बिना अनुमति इसका इस्तेमाल नियमों के खिलाफ है. FMC ने नेटफ्लिक्स से अनुरोध किया है कि वह इस टाइटल के इस्तेमाल से बचे. वहीं, दूसरा पत्र फिल्म के निर्माता नीरज पांडे की कंपनी फ्राइडे स्टोरी टेलर्स एलएलपी को भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि निर्माता ने इस टाइटल के लिए आवेदन तक नहीं किया था और नियमों के मुताबिक बिना अधिकृत टाइटल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि जवाब न देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.

फिल्म के खिलाफ क्या केस दर्ज हुआ

इस मामले को लेकर ब्राह्मण समाज, कई संगठनों और व्यक्तियों ने फिल्म निर्माताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में कहा गया है कि फिल्म का नाम एक पूरे वर्ग को गलत तरीके से दिखाता है और समाज में नकारात्मक संदेश देता है. इसी आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.

आगे क्या हो सकता है

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अदालत को लगता है कि फिल्म का नाम किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, तो फिल्म के टाइटल में बदलाव या प्रमोशन पर रोक जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. वहीं, निर्माता पक्ष अगर यह साबित कर देता है कि फिल्म का मकसद केवल सामाजिक संदेश देना है, तो मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में जा सकता है. फिलहाल, ‘घूसखोर पंडित’ अपने कंटेंट से ज्यादा अपने नाम को लेकर चर्चा और विवाद में घिर चुकी है. फिल्म में मुख्य किरदार मनोज बाजपेयी निभा रहे हैं और ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी.

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