
नोएडा: सेक्टर-79 स्थित महागुन मजारिया सोसायटी में एओए के गठन को चुनौती देने पहुंचे बिल्डर को हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट के निर्देश पर सोसायटी में मतदाता सूची फाइनल होने के 15 दिनों के भीतर दोबारा एओए चुनाव कराए जाएंगे।
इसके बाद 15 दिनों के भीतर बिल्डर को एओए के खाते में इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्यॉरिटी (आईएफएमएस) समेत अन्य फंड की रकम ट्रांसफर करनी होगी।
बिल्डर ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
एओए के अनुसार, यह रकम करीब 24 करोड़ रुपये है। सोसायटी में हुए चुनाव के बाद गठित कार्यकारिणी को डिप्टी रजिस्ट्रार, चिट्स एंड फंड, गाजियाबाद ने पंजीकृत किया था। बिल्डर ने इस एओए को गलत और नियमों के विरुद्ध बताते हुए 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 13 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान बिल्डर के अधिवक्ता ने दलील दी कि करोड़ों रुपये का फंड नियमों के विरुद्ध गठित एओए के खाते में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
परियोजना में 710 फ्लैट बिके
सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष विवाद सुलझाने पर सहमत हो गए। कोर्ट के संज्ञान में आया कि परियोजना में 710 फ्लैट बिक चुके है, जबकि 446 फ्लैटों को अधिभोग प्रमाणपत्र (ओसी) मिल चुका है। कोर्ट ने बिल्डर को यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 की धारा 12 के तहत मांगे गए सभी दस्तावेज एक सप्ताह में उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इसके बाद धारा 14 (2) के प्रावधानों के अनुसार एओए गठित की जाएगी। कोर्ट ने डिप्टी रजिस्ट्रार को चुनाव कराने और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के 15 दिनों के भीतर कॉमन एरिया, बुनियादी सुविधाओं और फंड का एओए को हैंडओवर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।



