कानपुर बना नया जामताड़ा, खेत-खंडहरों से चल रहा साइबर ठगी का खेल; पुलिस ने 8 को धर चबोच

कानपुर : थाना सचेंडी पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गैंग के आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का दावा है कि आरोपी क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर काॅल करते थे. आरोपी मोबाइल में चाइल्ड पोर्नोग्राफी का डर दिखाकर ठगी करते थे. आरोपियों ने देश भर के लोगों से करीब 2 करोड़ रुपये की ठगी की है.
पुलिस टीम ने जिन आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें गोरेलाल, राम जी, सर्वेश सिंह, अवधेश सिंह, अभिषेक, सविता, रामप्रकाश और रिंकू शामिल हैं. आरोपी कानपुर नगर के रहने वाले हैं, जबकि इनका एक अन्य साथी अभिषेक कानपुर देहात का निवासी है.
‘क्राइम ब्रांच का बताते थे अफसर’ : डीसीपी पश्चिम एस.एम. कासिम आब्दी ने बताया कि इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर और चौंकाने वाला था. गैंग के सदस्य आम लोगों को फोन करके खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते थे और उन्हें जाल में फंसाते थे. आरोपी मोबाइल पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी होने का डर दिखाकर व्यक्ति को डराते थे. आरोपी केस दर्ज करने और जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ित व्यक्ति से मोटी रकम वसूल लेते थे.
उन्होंने बताया कि जब कोई पीड़ित इनकी बातों में आसानी से नहीं आता था, तो ये लोग उसे विश्वास दिलाने के लिए फोन के पीछे से मोबाइल के जरिए पुलिस हूटर्स की आवाज निकालते थे. इसके बाद भी बात न बनने पर ये पीड़ितों को पुलिस बर्बरता और मारपीट के डरावने वीडियो भेजते थे और धमकी देते थे कि पैसे न देने पर उनके साथ भी ऐसा ही किया जाएगा.
पोर्टल पर दर्ज थीं 22 शिकायतें : उन्होंने बताया कि एनसीआरपी पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, इन अपराधियों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से कुल 22 शिकायतें दर्ज थीं. इस गैंग के निशाने पर मध्य प्रदेश का नीमच, राजस्थान का अजमेर और उत्तराखंड का टिहरी गढ़वाल क्षेत्र भी शामिल था. उन्होंने बताया कि इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बरेली, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, सिद्धार्थनगर, बिजनौर, कानपुर नगर, गाजियाबाद, मिर्जापुर, बलिया, लखनऊ और मुरादाबाद जिलों से भी इनके खिलाफ शिकायतें सामने आई थीं.
‘खेतों के बीच बैठकर करते थे काॅल’ : उन्होंने बताया कि पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने एक अनोखा तरीका निकाला था. यह लोग खेतों के बीच बैठकर लोगों को कॉल करते थे, ताकि पुलिस इन्हें आसानी से ट्रैक न कर सके. यह बेहद डिसेंट्रलाइज्ड यानी अलग-अलग होकर काम करते थे, जिससे इन्हें पकड़ना मुश्किल था. इनका एक सिम या बैंक खाता ब्लॉक होता था, तो ये तुरंत दूसरा खाता खुलवा लेते थे और फोन बदल-बदल कर ठगी जारी रखते थे.
मोबाइल, चेक बुक, पासबुक बरामद : पुलिस टीम ने गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के पास से साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले पांच मोबाइल, दो बैंक चेक बुक, दो पासबुक और दो डेबिट कार्ड बरामद किए हैं. इस पूरे मामले को लेकर थाना सचेंडी पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर आगे की आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है.



