उत्तर प्रदेशराज्‍य

यूपी के ‘अन्नदाता’ अब बनेंगे ‘एग्री-बिजनेसमैन’, कृषि बजट में 20 फीसदी की बढ़ोतरी; इनोवेशन से बदल रही तस्वीर

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों को ‘मिट्टी से सोना उगाने वाले अन्नदाता’ के रूप में मान्यता देती है और उन्हें प्रदेश की आर्थिक विकास यात्रा का मुख्य हिस्सा बनाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। ‘कम लागत-अधिक उत्पादन’ की नीति अपनाकर सरकार ने कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी सुधार को बढ़ावा दिया है। इससे किसानों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 10,888 करोड़ रुपये का कृषि बजट, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% अधिक है, इस संकल्प को और मजबूत करता है। यह बढ़ती वित्तीय प्रतिबद्धता सरकार की प्राथमिकताओं और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के दृष्टिकोण को दर्शाती है।

वाराणसी: सोलर पंप और सब्सिडी से आसान सिंचाई

काशी की उपजाऊ मिट्टी और ‘माँ अन्नपूर्णा’ के आशीर्वाद को आधुनिक तकनीक का साथ मिला है। वाराणसी जनपद में लगभग 3.05 लाख किसान सरकारी योजनाओं के माध्यम से खेती को आधुनिक और लाभकारी बना रहे हैं।

सरकार ने यहाँ ग्राम्य विकास के लिए 25,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे आधारभूत ढांचे में सुधार हो रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि सोलर पंप योजना ने सिंचाई की लागत घटाकर उत्पादन को बढ़ाया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान ने छोटे किसानों को बड़ी राहत दी है।

कानपुर: ‘खेत-तालाब योजना’ से खेती में नया बिज़नेस मॉडल

कानपुर के घाटमपुर ब्लॉक में सरकारी योजनाओं के मार्गदर्शन ने पारंपरिक खेती की परिभाषा बदल दी है। यहाँ के प्रगतिशील किसानों ने ‘खेत-तालाब योजना’ के तहत मत्स्य पालन (Fish Farming) को एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है।

वैज्ञानिक पद्धति और अधिकारियों के सहयोग से किसान अब एक सीजन में 8 से 9 लाख रुपये तक कमा रहे हैं, जो गेहूं और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों से मिलने वाली आय से कई गुना अधिक है। यह नवाचार न केवल पारिवारिक आय बढ़ा रहा है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है।

गोरखपुर: स्वीट कॉर्न की मिठास और 90% सब्सिडी का असर

गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक में ‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम’ ने किसानों की आय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। यहाँ एफपीओ (FPO) से जुड़े किसानों को स्वीट कॉर्न के बीज पर 90% की भारी सब्सिडी मिली, जिससे प्रति एकड़ लागत घटकर मात्र 8,000-10,000 रुपये रह गई।

महज ढाई महीने की फसल से किसानों ने प्रति एकड़ 1.25 लाख रुपये तक की आय अर्जित की। सरकार ने बजट में एफपीओ के लिए 75 करोड़ रुपये का ‘रिवॉल्विंग फंड’ भी प्रदान किया है, जिससे कृषि नवाचार का यह सिलसिला भविष्य में और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

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