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फांसी की सजा के बाद कैदी नंबर 395 और 396 बने साहिल-मुस्कान, जेल पहुंचते ही बिलख पड़े दोनों गुनहगार

मेरठ: मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी साहिल और मुस्कान का जेल के भीतर भावुक और बेचैन हो गए. वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ वीरेश राज शर्मा के अनुसार, कोर्ट का फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों जोर-जोर से रोने लगे और उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया. दोनों बार-बार अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे हैं. जेल प्रशासन ने उन्हें कानूनी विकल्पों की जानकारी दी है और उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है.

फैसले के बाद भावुक हुए दोनों दोषी

NDTV से खास बातचीत में जेलर वीरेश राज ने बताया कि नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा मिलने के बाद साहिल और मुस्कान काफी परेशान हैं. दोनों फैसला आने के बाद रो रहे हैं और उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया है. जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों ने अधिकारियों से पूछा कि अब आगे क्या होगा. इस पर उन्हें बताया गया कि उनके पास हाईकोर्ट में अपील करने का कानूनी अधिकार मौजूद है.

अलग-अलग सेल में रखे गए

सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों दोषियों को अलग-अलग सेल में रखा है. सुरक्षा कारणों से उनकी निगरानी बढ़ा दी गई है. साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को कैदी नंबर 396 आवंटित किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि दोनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.

पहनावे में भी होगा बदलाव

फांसी की सजा मिलने के बाद जेल नियमों के अनुसार दोनों के पहनावे में भी बदलाव किया गया है. साहिल अब जेल में सफेद पायजामा-कुर्ता पहनेगा, जबकि मुस्कान को क्रीम कलर की साड़ी या सूट उपलब्ध कराया जाएगा.

क्या है नीला ड्रम हत्याकांड?

पुलिस के अनुसार, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ राजपूत की हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि मुस्कान ने पहले अपने पति सौरभ को नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया और फिर साहिल की मदद से उसकी हत्या कर दी. जांच में सामने आया कि हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया गया. वारदात के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश चले गए थे. पुलिस ने 18-19 मार्च 2025 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था.

126 तारीखों तक चली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई गवाह और साक्ष्य पेश किए. करीब 126 तारीखों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को साहिल और मुस्कान को दोषी ठहराया था. इसके बाद सजा पर सुनवाई हुई और अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई. अब मामला आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय में अपील के चरण में जा सकता है.

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