उत्तर प्रदेशराज्‍य

यूपी के 16 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, LTC नियमों में हुआ राहत भरा बदलाव

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को अहम राहत दी है। अवकाश यात्रा सुविधा (एलटीसी) के नियमों में बदलाव करते हुए 15 दिन के अर्जित अवकाश की बाध्यता खत्म कर दी गई है। अब एलटीसी के दौरान स्वीकृत अधिकतम 10 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी मंजूर कर दी गई है। वेतन समिति की सिफारिशों पर विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के फैसले के मुताबिक वित्त विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है यानी, एलटीसी के लाभ के लिए अब कर्मचारियों को कम से कम 15 दिन का अर्जित अवकाश लेने की बाध्यता खत्म कर दी गई है।

तनख्वाह का 50 फीसदी होगा मूल वेतन

इसके पहले चार अगस्त को योगी सरकार ने यूपी के लाखों कामगारों और सेवायोजकों को अच्छी खबर दी थी। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई थी। इसके लागू होने के बाद अब किसी भी पात्र कर्मचारी को न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन नहीं दिया जा सकेगा, चाहे वह किसी भी क्षेत्र, प्रतिष्ठान या नियोजन में कार्यरत हो। संहिता में प्रावधान किया गया है कि कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूल वेतन होगा।

कौशल और काम की प्रकृति से निर्धारित होगी मजदूरी

नई श्रम संहिता के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने की व्यवस्था को सभी पात्र कर्मचारियों तक विस्तारित किया गया है। कौशल, कार्य की प्रकृति और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर मजदूरी निर्धारित होगी। केंद्र सरकार द्वारा तय ‘फ्लोर वेज’ से कम न्यूनतम मजदूरी कोई राज्य सरकार तय नहीं कर सकेगी। वहीं श्रमिकों की मजदूरी से वैधानिक कटौती की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। संविदा श्रमिकों की मजदूरी और बोनस भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता पर होगी। मृत कर्मचारी के बकाया भुगतान के लिए नामित व्यक्ति और उसके अभाव में विधिक उत्तराधिकारी को राशि देने का प्रावधान भी किया गया है। नियोक्ताओं को भी नई व्यवस्था में राहत दी गई है। पहली बार नियमों के उल्लंघन पर उपशमन का प्रावधान होगा। अनुपालन का बोझ घटाते हुए अब केवल तीन रजिस्टर और दस प्रपत्र रखने होंगे।

वार्षिक विवरण सहित अन्य दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा किए जा सकेंगे। नई संहिता में श्रम निरीक्षण प्रणाली को भी पारदर्शी बनाने का प्रावधान किया गया है। ऑनलाइन और जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू होगी तथा ‘श्रम निरीक्षक’ की जगह ‘निरीक्षक-सह-सुविधा प्रदाता’ की व्यवस्था होगी, जो नियमों के अनुपालन के साथ नियोक्ताओं और कर्मचारियों को परामर्श एवं मार्गदर्शन भी देगा। इसके अलावा विवादों में विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील की व्यवस्था की गई है। पहले इसमें हाईकोर्ट जाने की व्यवस्था थी।

इसके साथ ही भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्त विनियमन) उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक 2020 को भारत सरकार से वापस लिए जाने संबंधी श्रम विभाग के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। दरअसल नई श्रम संहिताओं के प्रभावी होने के चलते पुरानी नियमावली के स्वत: ही निष्प्रभावी होने के चलते यह निर्णय लिया गया है।

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