12 बजे उठना, 5 बजे जिम और 7 बजे सजाते थे महफिल…CM योगी ने अखिलेश पर साधा निशाना

बहजोई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने लगभग आधे घंटे से अधिक के संबोधन के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव के लिए यूपी का सियासी संदेश देने का प्रयास किया। जिसमें नौकरी भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भर्तियों में सैफई का सिंडिकेट चलता था, जबकि अब युवाओं को बिना भेदभाव समान अवसर मिल रहे हैं।
इसमें संभल के भी युवा विभिन्न विभागों में अधिकारी और कर्मचारी बन रहे हैं। यूपी पुलिस में भी खूब बाजी मार रहे हैं। धार्मिक विरासत, विकास, कानून व्यवस्था और सरकार की उपलब्धियों के बीच उनका पूरा भाषण मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर केंद्रित रहा। अपने संबोधन के दौरान बहुजन समाज पार्टी का उन्होंने एक बार भी नाम नहीं लिया।
भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने सपा पर पांच बार राजनीतिक प्रहार किए। उन्होंने सपा शासन को दंगों और अराजकता से जोड़ते हुए कहा कि पहले संभल दंगों की पहचान बन गया था, निर्दोष लोग मारे जाते थे और दंगाइयों को संरक्षण मिलता था।
उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और कहा कि पुरानी सरकार के मुखिया सुबह जल्दी न उठकर दोपहर 12 बजे उठते थे और फिर जिम जाते थे। इसमें शाम हो जाती थी फिर वहां महफिल सज जाती थी और विकास कार्य पीछे छूट जाते थे। उन्होंने विकास के बारे में सोचा ही नहीं, योजनाओं पर 2017 से पहले फोकस हुआ ही नहीं।
इसके बाद उन्होंने तीर्थों और गरीबों की भूमि पर कब्जों का मुद्दा उठाते हुए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और रामनवमी की शोभायात्राओं में बाधा डालने वालों पर टिप्पणी कर सपा पर हमला किया। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 से पहले दंगाइयों को लखनऊ में सम्मान मिलता था, जबकि अब कानून का राज है।
कांग्रेस पर मुख्यमंत्री ने दो बार निशाना साधा। पहली बार भूमि अभिलेख नष्ट करने, आस्था का अपमान और गुलामी की मानसिकता का आरोप लगाया, जबकि दूसरी बार योजनाओं में भ्रष्टाचार, गरीबों के अधिकारों की अनदेखी और विकास कार्यों में बाधा का मुद्दा उठाया।
इसके विपरीत उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों में 10 हजार एकड़ भूमि कब्जामुक्त कराने, तीर्थों के पुनर्जीवन, गंगा एक्सप्रेसवे, पुलिस लाइंस, पीएसी, फोरलेन सड़कें, निश्शुल्क राशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और कानून व्यवस्था को प्रमुखता से गिनाया। पूरे संबोधन में भाजपा की उपलब्धियों की तुलना केवल सपा और कांग्रेस के शासनकाल से की गई, लेकिन बसपा का एक बार भी उल्लेख नहीं हुआ।



