उत्तर प्रदेशराज्‍य

सीएम योगी का बड़ा आदेश, अनावश्यक नियम हटेंगे; आम आदमी के लिए सिस्टम होगा आसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रशासनिक सुधारों को नई दिशा देने की ओर लगातार आगे बढ़ रही है। शासन का स्पष्ट लक्ष्य नागरिकों और उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं, अनुमतियों और निरीक्षणों से राहत देकर भरोसे पर आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध प्रशासन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर सुधार का असर केवल फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रभाव जमीन पर दिखे और आम व्यक्ति को यह महसूस हो कि व्यवस्था वास्तव में उसके लिए सरल हुई है।

कम्प्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन फेज-दो की समीक्षा

गुरुवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कम्प्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन फेज-दो के तहत किए जा रहे सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कम्प्लायंस रिफॉर्म्स के पहले चरण में देशभर में एक मजबूत पहचान बनाई है और अब फेज-दो के माध्यम से इन सुधारों को स्थायी और संस्थागत स्वरूप देना सरकार की प्राथमिकता है। यह चरण केवल नियमों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक सोच और कार्यप्रणाली में व्यापक परिवर्तन का माध्यम है।

डी-रेगुलेशन का उद्देश्य और सरकार की सोच

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डी-रेगुलेशन का अर्थ नियंत्रण समाप्त करना नहीं है, बल्कि अनावश्यक नियंत्रणों को हटाकर आवश्यक नियमों को सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाना है। सरकार का संकल्प उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, दोनों ही मानकों पर देश का अग्रणी राज्य बनाना है।

फेज-एक में उत्तर प्रदेश की उपलब्धि

बैठक में जानकारी दी गई कि कैबिनेट सचिवालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को कम्प्लायंस रिडक्शन फेज-I में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। फेज-दो के अंतर्गत कुल 9 थीम, 23 प्राथमिक क्षेत्र और 5 वैकल्पिक प्राथमिक क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, जिन पर चरणबद्ध तरीके से सुधार लागू किए जा रहे हैं।

भूमि उपयोग नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

भूमि उपयोग से जुड़े सुधारों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि किसानों और भू-स्वामियों को अनावश्यक परेशानियों से बचाने के लिए चेंज इन लैंड यूज जैसी जटिल अनुमतियों को समाप्त करने या सरल बनाने पर काम किया जा रहा है। नियोजित क्षेत्रों में मास्टर प्लान के अनुरूप भूमि उपयोग के मामलों में अलग से अनुमति की आवश्यकता समाप्त करने तथा अनियोजित क्षेत्रों में भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

भवन निर्माण प्रक्रियाएं होंगी आसान

भवन निर्माण और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सुधारों को लेकर बताया गया कि नक्शा पास कराने, लेआउट अप्रूवल और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं को अब रिस्क-बेस्ड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसके अंतर्गत सेल्फ-सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल को बढ़ावा देकर आम नागरिकों और बिल्डर्स को अनावश्यक देरी से राहत देने की व्यवस्था की जा रही है।

बिजली कनेक्शन और अनुमतियां होंगी ऑनलाइन

यूटिलिटीज और विभागीय अनुमतियों से जुड़े सुधारों के तहत अलग-अलग विभागों की प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है, जहां स्पष्ट समय सीमा तय होगी। ऊर्जा क्षेत्र में बिजली कनेक्शन, लोड बढ़ाने और अन्य तकनीकी अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूवल सिस्टम को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके।

समय सीमा में सुधार लागू करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने सुधारों को तय समय सीमा में लागू करें और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ये सुधार केवल उद्योगों और निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिक के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए भी हैं, चाहे वह घर बनाना हो, बिजली-पानी का कनेक्शन लेना हो या किसी छोटी सेवा से जुड़ी अनुमति।

अनावश्यक क्लीयरेंस हटाने पर जोर

फेज-दो के तहत निरीक्षणों की संख्या कम करने, पुराने और अप्रासंगिक नियमों को समाप्त करने तथा सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटाइज और समयबद्ध बनाने पर कार्य किया जा रहा है। पर्यावरण संबंधी अनुमतियों में कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए अनावश्यक क्लीयरेंस समाप्त कर ट्रस्ट-बेस्ड अप्रोच अपनाई जा रही है, जबकि उच्च जोखिम वाले मामलों में पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाए रखते हुए स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।

पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी सुधार

बैठक में पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेक्टर से जुड़े सुधारों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पर्यटन परियोजनाओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अनुमतियों को सरल बनाकर निवेश और सेवाओं के विस्तार को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हों और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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