
नोएडा। देश का सबसे सुरक्षित शहर मंगलूरु है, यह बेंगलुरु के बाद कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक व व्यापारिक केंद्रों माना जाता है। इस शहर की तर्ज पर अब नोएडा को सुरक्षित रखने की योजना प्राधिकरण ने तैयार की है।
योजना पर 21264.12 लाख रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है, इसके तहत शहर के विभिन्न स्थानों पर 2500 हाईटेक कैमरों को लगाया जाएगा, जिसे 20000 उन लोकेशन से जोड़ा जाएगा, जिसमें ग्रुप हाउसिंग, मकान, दुकान, अस्पताल, स्कूल-कालेज, मंदिर, मंदिर, मस्जिद, सिनेमाघर, पब बार, शापिंग माल, बाजार, औद्योगिक-व्यापारिक प्रतिष्ठान के बाहर लगने वाले सभी सीसीटीवी इंट्रीगेट होंगे।
संचालन के लिए सेक्टर-94 में इंटीग्रेटेड एंड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइएसटीएमएस) के ऊपर एक नया कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, यह दोनों कंट्रोल रूम आपस में इंटीग्रेटेड होंगे। यही नहीं ग्रेटर नोएडा व यमुना क्षेत्र को भी इन कंट्रोल रूप से जोड़ने का एक्सेस भी शामिल रहेगा। इससे शहर की सड़क से लेकर गलियाें ही नहीं, बल्कि जिले के चप्पे चप्पे पर पैनी नजर रखी जा सकेगी।
दस दिन में जारी होगा टेंडर
परियोजना को धरातल पर उतारने लिए दस दिन में टेंडर जारी होगा। डेढ़ माह में कार्य आवंटन कर योजना को एक वर्ष में पूरा किया जाएगा। परियोजना की आइआइटी विट होकर शुक्रवार को आ गई है, इसके बाद प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई। इसमें नोएडा ही नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा से संबंधित अधिकारियों के साथ गाया कंसलटेंट व पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
इसमें बताया गया कि सेक्टर-94 में इंटीग्रेटेड एंड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइएसटीएमएस) कंट्रोल रूप के जरिये 1300 सीसीटीवी कैमरों से पैनी नजर रखी जा रही जा रही है। इसके बाद सेफ सिटी परियोजना को धरातल पर उतारने की प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने अंतिम मंजूरी संबंधित अधिकारियों को प्रदान की। इस मौके पर महाप्रबंधक एसपी सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक रविंद्र कुमार, ओएसडी अभिषेक, विनय तोमर समेत अन्य शामिल रहे।
यह होगी खासियत
- सेफ सिटी के कंट्रोल रूम सीधे पुलिस मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। कोई भी जानकारी या सूचना मिलने पर तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन, चौकी और पीआरवी और डायल-112 को जानकारी दी जा सकेगी। फेस डिटेक्शन कैमरे लगाए जाएंगे।
- बदमाशों का डाटा पुलिस के पास पहले से रहेगा। कोई भी बदमाश यदि इन कैमरों की जद में आता है तो उसकी लाइव लोकेशन और पूरा डाटा कंट्रोल रूम में दिखाई देगा। उसे आसानी से पकड़ा जा सकेगा। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के बाद इसकी पूरी ट्रैनिंग पुलिस को देगी।
- पैन टिल्ट जूम कैमरा किसी भी समय चारों तरफ घुमाया जा सकता है। इसके साथ 1700 मीटर तक इसकी रिकार्डिंग जूम कर साफ देखी जा सकेगी। बुलेट कैमरा 250 से ज्यादा की स्पीड में गुजरे वाहन की फुटेज बनाने में सक्षम होंगे। आटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर व सामान्य सीसीटीवी पहले से आइएसटीएमएस में लगे हुए हैं।
परियोजना को धरातल पर उतरने की सारी बाधाओं को दूर कर लिया गया है। दस दिन में टेंडर जारी कर डेढ़ माह में काम शुरू करा दिया जाएगा। एक वर्ष में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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कृष्णा करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण।



