उत्तर प्रदेशराज्‍य

चंदौली का रहस्यमयी ‘हेतम खान’ किला… जहां पूरी की पूरी बारात हो गई थी गायब!

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित एक ऐतिहासिक किला आज भी रहस्य और रोमांच का केंद्र बना हुआ है। यह किला 16वीं शताब्दी में मुगल काल के दौरान हेतम खान द्वारा बनवाया गया था। आज यह पुरातत्व विभाग (ASI) की देखरेख में है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कहानियां और किवदंतियां आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं।

गायब हो गई थी पूरी बारात!

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, वर्षों पहले एक बारात इसी किले में ठहरी थी। किला भूलभुलैया जैसा था और इसमें कई सुरंगें व रहस्यमयी रास्ते थे। बताया जाता है कि बारात रास्ता भटक गई और उसके बाद से कोई भी बराती वापस नहीं लौटा। इस रहस्यमयी घटना के बाद से किले को लेकर तमाम अंधविश्वास और कहानियां जुड़ गईं।

कई कमरों में लगे हैं भारी-भरकम ताले

किले के भीतर कई विशाल कमरे और सुरंगें मौजूद हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन सुरंगों का उपयोग युद्धकाल में राजा द्वारा धानापुर तक पहुंचने के लिए किया जाता था। आज भी इन कमरों पर बड़े-बड़े ताले लगे हैं। कुछ लोगों का दावा है कि उन्होंने किले में रात के समय खुदाई की कोशिश की थी, लेकिन दम घुटने जैसी स्थिति बनने पर वे भाग खड़े हुए।

हजारों कहानियों का गवाह बना कोर्ट परिसर

कहा जाता है कि हेतम खान ने किले के अंदर तीन अलग-अलग कोर्ट बनवाए थे — पूर्वी, पश्चिमी और मध्य कोर्ट। किंवदंती है कि जब कोर्ट बनवाया जा रहा था, तब बार-बार निर्माण गिर जाता था। इस पर एक व्यक्ति को ‘जिंदा चुनवाने’ की कहानी भी सामने आती है। ग्रामीणों का मानना है कि इन कोर्टों की रक्षा रूद्र ब्रह्म बाबा करते हैं, और कोई भी इनके अवशेष तक घर नहीं ले जाता।

अब सिर्फ खंडहर, पर इतिहास की झलक आज भी मौजूद

यह किला 22 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है। मुगल काल के बाद इसे एक स्थानीय जागीरदार ने अधिग्रहीत कर लिया था। किले में पांच प्रमुख हिस्से हैं- भूलेंनी कोर्ट, भीतरी कोर्ट, बिचली कोर्ट, उत्तरी कोर्ट, दक्षिणी कोर्ट। आज ये सभी खंडहर हो चुके हैं, लेकिन इतिहास और रहस्य के शौकीनों को आज भी आकर्षित करते हैं।

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