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कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जिन्हें मिली कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की कमान, यूपी चुनाव 2027 के लिए बड़ा दांव

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है. कांग्रेस ने आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है. उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है. आराधना मिश्रा के अलावा इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है.

कुछ दिन से पहले यूपी में बदलाव की अटकलें थीं. आराधना मिश्रा से पहले अजय राय प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे. अजय राय अगस्त 2023 से प्रदेश अध्यक्ष थे.

कौन हैं आराधना मिश्रा?

आराधना मिश्रा के पास राजनीति में दो दशकों का अनुभव है. उन्हें मोना भी कहा जाता है. उनका जन्म 20 अप्रैल 1974 को हुआ था. आराधना मिश्रा राजनीतिक परिवार से आती हैं. वह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं.

आराधना मिश्रा उसी रामपुर खास सीट से विधायक हैं, जहां से उनके पिता प्रमोद तिवारी 9 बार विधायक रहे हैं. प्रतापगढ़ जिले की इस सीट पर तिवारी परिवार का 5 दशकों से प्रभाव है. उनके पिता प्रमोद तिवारी पहली बार 1980 में यहां से विधायक बने थे.

राजनीति में कैसे हुई एंट्री

आराधना की चुनावी राजनीति में एंट्री उपचुनाव से हुई. प्रमोद तिवारी के राज्यसभा जाने के बाद रामपुर खास सीट पर जब उपचुनाव हुए तो कांग्रेस ने आराधना मिश्रा को उम्मीदवार बनाया. पहला ही चुनाव उन्हें 67,679 वोटों के अंतर से जीता था.

इसके बाद 2017 और 2022 में वह लगातार इसी सीट से विधायक चुनी गईं. 2017 में उन्होंने 17,066 वोटों से जीत हासिल की. 2022 में उन्होंने बीजेपी के नागेश प्रताप सिंह को 14,741 वोटों से हराया.

एक तीर से साधे दो निशाने

आराधना मिश्रा को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने यूपी चुनाव से पहले बड़ा दांव खेला है. कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है.

आराधना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आती हैं. उन्हें अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटों को साधने की कोशिश की है. यूपी की 100 से ज्यााद सीटों पर ब्राह्मण वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं. उनकी संख्या 12 फीसदी से ज्यादा है.

इसके अलावा, आराधना मिश्रा को कमान सौंपकर महिला वोटर को भी संदेश देने की कोशिश की है. कई राज्यों के चुनावों में महिलाओं की बदौलत बीजेपी सरकार बनाती आई हैं.

बीजेपी के इसी वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कांग्रेस कर रही है. 2022 के चुनाव में भी कांग्रेस ने ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देकर सेंध लगाने की कोशिश की थी. हालांकि, पार्टी को इसका कोई फायदा नहीं मिला था.

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