उत्तर प्रदेशराज्‍य

अखिलेश यादव ने पवन पांडेय को अयोध्या से सपा कैंडिडेट बनाया, चढ़ावा चोरी मुद्दे से चमकी राजनीति

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी अभी से प्रचार में जुट गई है. इस बीच समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने अयोध्या सीट पर अभी से अपना उम्मीदवार तय कर दिया है. यह पहला मौका है जब 2027 के चुनाव से पहले सपा ने किसी सीट पर अपना उम्मीदवार घोषित किया है. उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि पवन पांडे अयोध्या से इस बार चुनाव जीतने जा रहे हैं. आखिर पवन पांडे कौन हैं, जिस पर अखिलेश यादव ने भरोसा जताया है? आइए बताते हैं

अखिलेश यादव बुधवार को लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर एक ब्राह्मण सभा में पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि अयोध्या सदर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर पवन पांडे चुनाव लड़ेंगे. ब्राह्मण सभा में अखिलेश ने कहा कि पवन पांडे अयोध्या से इस बार चुनाव जीतने जा रहे हैं.

कौन हैं पवन पांडे?

पवन पांडे समाजवादी पार्टी के युवा नेता हैं. उनका असली नाम तेज नारायण पांडे है. पांडे 2012 से इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय से की थी, जहां वह साल 2004 में छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए थे. इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में लगातार सक्रिय रहे और अखिलेश यादव की कोर टीम (‘टीम इलेवन’) के खास सदस्य बने. 2017 और 2022 में उन्हें यहां से हार मिली थी. उन्हें अखिलेश यादव का करीबी और भरोसेमंद माना जाता है. 2017 और 2022 की करारी हार के बाद भी अखिलेश यादव ने उन पर भरोसा जताया है.

पवन पांडे साल 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार में वन राज्य मंत्री रह चुके हैं. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अयोध्या (फैजाबाद) सीट से चुनाव लड़कर एक बड़ी जीत हासिल की थी, जहां उन्होंने भाजपा के कद्दावर उम्मीदवार को शिकस्त दी थी. फिलहाल वह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं में से एक हैं और अक्सर मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हैं.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया

पवन पांडे हाल ही में चर्चा में तब आए जब उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे चोरी का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया. उन्होंने दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे में विसंगतियों की भनक सबसे पहले खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लगी थी, जिन्होंने उन्हें फोन कर जमीनी स्तर पर इस मामले की पुष्टि करने को कहा था. इस मुद्दे को उठाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कथित घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया है.

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