विकास दुबे का साथी दयाशंकर अदालत से बरी, बिकरू कांड के 2 दिन बाद हुआ था गिरफ्तार

कानपुर। अपर जिला जज 16 अगस्त कुमार तिवारी की कोर्ट ने बिकरू कांड को अंजाम देने वाले कुख्यात विकास दुबे के साथी दयाशंकर अग्निहोत्री को पुलिस मुठभेड़ के मुकदमे में साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। कल्याणपुर पुलिस ने बिकरू कांड की घटना के दो दिनों बाद उसे शिवली रोड से मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। वह बिकरू कांड में भी आरोपित है।
बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे ने पुलिस टीम पर हमला कर सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक घटना में विकास दुबे का साथी दयाशंकर अग्निहोत्री भी शामिल था। पुलिस ने उस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था।
चार जुलाई 2020 की देर रात शिवली रोड पर कल्याणपुर पुलिस ने उसे घेर लिया। आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बाद दयाशंकर ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपी के पास से असलहा बरामद किया था। इसके बाद हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट में कल्याणपुर पुलिस ने उस पर मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले की सुनवाई एडीजे 16 की कोर्ट में चल रही थी। अधिवक्ता अश्वनी त्रिपाठी ने बताया कि 13 जुलाई को मामले में अंतिम बहस पूरी हो गई थी। अभियोजन की ओर से मामले में नौ गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सोमवार को कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पुलिस की कहानी को साबित नहीं कर सका।
गवाहों के बयान भी विरोधाभाषी हैं। आरोपित दयाशंकर अग्निहोत्री को इसका लाभ देते न्यायालय ने उसे आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास (पुलिस पर गोली चलाने) के आरोपों में दोषमुक्त करार दिया।
पांच साल पहले तय हुए थे आरोप
अधिवक्ता ने बताया कि दयाशंकर के खिलाफ आठ जनवरी 2021 को आरोप तय हुए थे। 15 अप्रैल 2023 को अभियोजन की ओर से साक्ष्य पूरे होने के बाद 17 अप्रैल 2025 को आरोपित के बयान दर्ज किए गए।
नहीं ठहरी पुलिसिया कहानी
पुलिस मुठभेड़ की कहानी कोर्ट में नहीं ठहर सकी। दयाशंकर को जब पुलिस ने पकड़ा तो उसके पास से 315 बोर का तमंचा, दो खोखा और दो जिंदा कारतूस सील किए गए। कोर्ट में खोखा चार हो गए। एफएसएल अधिकारी ने कहा कि उन्हें सुबह 3:45 बजे मुठभेड़ की जानकारी मिली लेकिन विवेचना में गोली लगने का समय 4:40 बजे दर्ज किया गया। दयाशंकर के पैर में पुलिस की नौ एमएम पिस्टल से चली गोली लगी थी। मौके पर कारतूस सीज किया गया लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। एफएसएल अधिकारी ने बयान दिया कि विवेचक मौके पर मिले थे जबकि विवेचक का बयान था कि उन्हें अगले दिन सुबह 8:30 बजे विवेचना दी गई।



