उत्तराखंडराज्‍य

देवस्थानम बोर्ड पर फिर सुलगी सियासत, केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों का पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत पर तीखा हमला

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा देवस्थानम बोर्ड के पक्ष में दिए गए बयान के बाद उत्तराखंड चारधाम तीर्थपुरोहित महापंचायत ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।

महापंचायत ने दावा किया कि देवस्थानम बोर्ड अपने गठन के समय से ही अव्यवस्था, विवाद और अनियमितताओं से घिरा रहा। पदाधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह बोर्ड की 10 उपलब्धियां सार्वजनिक करते हैं तो महापंचायत उसकी 20 खामियां तथ्यों के साथ जनता के सामने रखेगी।

कई धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप

महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल व महासचिव डा. बृजेश सती ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के दो वर्ष के कार्यकाल में चारधाम की परंपराओं और धार्मिक व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि अनादिकाल से चली आ रही कई धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप किया गया, जिसे सनातन समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम के इतिहास में पहली बार मंदिर के कपाट खुलने की घोषित तिथि में बदलाव किया गया। इसके अलावा भगवान बदरीविशाल के ब्रह्ममुहूर्त में होने वाले अभिषेक के समय में भी परिवर्तन किया गया, जिससे आदि गुरु शंकराचार्य की स्थापित परंपरा प्रभावित हुई। महापंचायत का कहना है कि वर्ष 2020 की यात्रा के दौरान जारी एसओपी के जरिए अभिषेक पूजा की व्यवस्था बदली गई, जो धार्मिक परंपराओं के विपरीत थी।

महापंचायत ने यह भी आरोप लगाया कि देवस्थानम बोर्ड के गठन के 40 दिन बाद सीईओ की नियुक्ति की गई। उनका कहना है कि यह नियुक्ति उस समय हुई, जब बोर्ड के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर हो चुकी थी।

साथ ही सीईओ की नियुक्ति के लिए नियमावली में संशोधन किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि केदारनाथ धाम की पंचमुखी डोली व रूपछड़ को गौरीकुंड तक मालवाहक वाहन से ले जाया गया, जो धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं था। उन्होंने पूछा कि यदि देवस्थानम अधिनियम पूरी तरह व्यवस्थित था तो बाद में उसमें कई संशोधन करने की जरूरत क्यों पड़ी।

महापंचायत के प्रमुख सवाल

  • देवस्थानम बोर्ड बनने के 40 दिन बाद ही सीईओ की नियुक्ति क्यों की गई?
  • सीईओ की नियुक्ति के लिए नियमावली में संशोधन क्यों करना पड़ा?
  • बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की निर्धारित तिथि 30 अप्रैल से बदलकर 15 मई क्यों की गई?
  • वर्ष 2020 की एसओपी के जरिए अभिषेक पूजा की परंपरा में बदलाव क्यों किया गया?
  • केदारनाथ की पंचमुखी डोली और रूपछड़ को मालवाहक वाहन से क्यों ले जाया गया?
  • देवस्थानम अधिनियम लागू होने के बाद उसमें बार-बार संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
  • बीकेटीसी के सेवानिवृत्त विधि अधिकारी को नियत वेतन पर दोबारा सेवा में क्यों रखा गया?

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