यूपीडा का आवंटियों पर तगड़ा ऐक्शन, अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर में तीन के जमीन आवंटन रद्द

लखनऊ : यूपीडा ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अलीगढ़ फेज-1 डिफेंस नोड में तीन कंपनियों के भूमि आवंटन रद्द कर दिए हैं. भूमि आवंटन के लगभग पांच वर्ष बाद भी निर्माण एवं औद्योगिक गतिविधियां प्रारंभ नहीं किए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास नीति के अनुरूप, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में आवंटित भूमि का उपयोग केवल रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण गतिविधियों के लिए किया जाना है. ऐसे में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा-UPEIDA) द्वारा ऐसे आवंटियों के निरस्तीकरण की कार्यवाही की गई है, जिनको अपनी इकाई स्थापित कर उत्पादन के साथ रोजगार सृजन भी करना था.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल : UPDIC देश की प्रमुख रणनीतिक औद्योगिक परियोजनाओं में से एक है, जिसकी घोषणा भारत सरकार द्वारा प्रदेश में रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को गति देने के उद्देश्य से की गई थी. यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के छह प्रमुख अलीगढ़, आगरा, लखनऊ, कानपुर, झांसी और चित्रकूट में विकसित किया जा रहा है.
निवेशकों के लिए सरकार की नीति : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत भूमि आवंटन के साथ समयबद्ध निवेश और परियोजना क्रियान्वयन की शर्तें निर्धारित की गई हैं. निवेशकों को निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण कार्य प्रारंभ करना तथा उत्पादन गतिविधियां शुरू करना अनिवार्य है. परियोजनाओं की प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाता है और विलंब की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जाती है.
UPDIC के अंतर्गत निवेशकों को सब्सिडी दरों पर पूर्व-विकसित औद्योगिक भूमि ‘रेडी-टू-मूव आधारभूत संरचना के साथ उपलब्ध कराई जाती है. इसकी खासियत प्लग-एंड-प्ले सुविधा से साइट विकास में लगने वाला समय कम होता है, वहीं नोड्स का रणनीतिक चयन बाजार एवं लॉजिस्टिक्स तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन में सहायता मिलती है.
हालांकि, कुछ मामलों में यह पाया गया कि आवंटन के काफी समय बीत जाने के बावजूद, संबंधित भूखंडों पर भौतिक प्रगति का स्तर संतोषजनक नहीं था, जिससे संबंधित क्षेत्र के समग्र विकास और अपेक्षित रोजगार सृजन प्रभावित हो रहा था. निर्धारित निवेश किए बिना ऐसे भूखंडों को लंबे समय तक रोके रखना न केवल मूल्यवान सार्वजनिक संसाधनों के अप्रभावी उपयोग का कारण बनता है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी प्रभावित करता है.
इस प्रकार की देरी रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को बाधित करती है, जिससे क्षमता निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला विकास और रोजगार सृजन की प्रक्रिया धीमी पड़ती है. यूपीडा ने अपने नियामकीय दायित्वों के अंतर्गत, आवंटित भूखंडों की अनुपालन स्थिति की व्यापक समीक्षा की और लगातार लापरवाही और ग़ैर जिम्मेदाराना तरीके से काम करने वाले आवंटियों की पहचान चिन्हित की.
इन कंपनियों का आवंटन किया गया रद्द
जय साई अनु : जुलाई 2021 में 4.5 हेक्टेयर भूमि 100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के आधार पर आवंटित की गई थी. निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद कंपनी द्वारा कोई विनिर्माण सुविधा स्थापित नहीं की गई.
नवराज मेटल्स : जून 2021 में 1.6 हेक्टेयर भूमि 20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर आवंटित की गई थी. समीक्षा के दौरान निर्माण कार्य में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं पाई गई.
पीबीएम इंसुलेशन्स : जून 2021 में 0.4 हेक्टेयर भूमि 4 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव के साथ आवंटित की गई थी. कंपनी द्वारा परियोजना क्रियान्वयन में अपेक्षित रुचि और प्रगति नहीं दिखाई गई.
यूपीडा का निवेशकों को स्पष्ट संदेश : इस कार्रवाई के माध्यम से यूपीडा ने स्पष्ट कर दिया है कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में केवल गंभीर और प्रतिबद्ध निवेशकों को ही अवसर प्रदान किए जाएंगे. जिन कंपनियों द्वारा निर्धारित समयसीमा में परियोजनाएं शुरू नहीं की जाएंगी, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है. यहां उपलब्ध भूमि रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक संसाधन है, न कि केवल भूमि सुरक्षित रखने के लिए. प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि सभी आवंटी निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश और उत्पादन गतिविधियां शुरू करें.


