एनसीआरग्रेटर नोएडा

गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा में गरजा बुलडोजर, अवैध प्लाटिंग और निर्माण को ध्वस्त किया गया

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (Greater NOIDA  Authority) ने सोमवार को अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बिसरख के डूब क्षेत्र (Floodplain zone) में बड़ी संख्या में अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया. प्राधिकरण की इस सख्त कार्रवाई से भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है. टीम ने करीब 25 हजार वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराया है, जहां कालोनाइजर बाउंड्री वॉल बनाकर अवैध प्लाटिंग कर रहे थे.

प्राधिकरण के वर्क सर्किल तीन की टीम सोमवार को भारी पुलिस बल और बुलडोजरों के साथ बिसरख क्षेत्र पहुंची. जानकारी के मुताबिक, इसके बाद डूब क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली खसरा संख्या 333 और 334 की जमीन बुलडोजर की कार्रवाई की गई. दरअसल, वहां कुछ कालोनाइजर अवैध रूप से कॉलोनी काटने रहे थे. टीम ने मौके पर बने अवैध निर्माणों और बाउंड्री वॉल्स को पूरी तरह जमींदोज कर दिया. प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोबारा इन जमीनों पर अतिक्रमण की कोशिश की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

लगातार जारी है अतिक्रमण विरोधी अभियान

यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है. दरअसल, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पिछले कुछ समय से अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए हैं. इससे पहले भी वर्क सर्किल तीन की ओर से तिलपता, रौजा याकूबपुर, खेड़ा चौगानपुर और चिपियाना बुजुर्ग जैसे इलाकों में बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाए जा चुके हैं. प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने सभी अधिसूचित क्षेत्रों में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई जारी रखने के कड़े निर्देश दिए हैं.

‘गाढ़ी कमाई को जोखिम में न डालें’

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ (ACEO) सुमित यादव ने इस मामले में आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के अधिसूचित एरिया में किसी भी व्यक्ति को अवैध निर्माण या कॉलोनी बसाने की अनुमति नहीं है.

निवेशकों के दिए मुख्य सुझाव

  • ग्रेटर नोएडा में कहीं भी प्लॉट या जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण से उसकी वैधता की पुष्टि जरूर करें.
  • कॉलोनाइजरों के बहकावे में आकर अवैध कॉलोनियों में पैसा न लगाएं.
  • बिना नक्शा पास कराए या अधिसूचित क्षेत्र में किया गया कोई भी निर्माण अवैध माना जाएगा और उस पर कभी भी बुलडोजर चल सकता है.

डूब क्षेत्र में निर्माण न केवल अवैध है, बल्कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी जोखिम भरा है. प्राधिकरण का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मास्टर प्लान के विपरीत कोई भी बसावट न हो, जिससे भविष्य में बुनियादी सुविधाओं और जल निकासी जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े. प्राधिकरण की टीमें अब लगातार गश्त कर रही हैं, ताकि मुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा न हो सके.

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