‘आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा भारत’, पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर बोले पीएम मोदी

भारत आज उस काले दिन को याद कर रहा है जब पहलगाम की वादियों को रक्तरंजित कर दिया गया था। इस भीषण आतंकी हमले की पहली बरसी पर राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व ने न केवल शहीदों और निर्दोष नागरिकों को नमन किया, बल्कि वैश्विक पटल पर यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब झुकने वाला राष्ट्र नहीं है।
शोक और शक्ति का संगम: प्रधानमंत्री का उद्घोष
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की भावनाओं को स्वर देते हुए कहा कि आतंकवाद के घिनौने कृत्य भारत के मनोबल को कभी डिगा नहीं सकते। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए स्पष्ट संदेश दिया:
“भारत आतंकवाद के किसी भी स्वरूप के सम्मुख कभी नतमस्तक नहीं होगा। आतंकियों के नापाक मंसूबे इस मिट्टी की दृढ़ता के आगे सदैव विफल रहेंगे। हम शोक और संकल्प, दोनों में एक अटूट राष्ट्र के रूप में खड़े हैं।”
अतीत का वह घाव: लश्कर की कायराना हरकत
विदित हो कि पिछले वर्ष 22 अप्रैल को सीमा पार स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने जम्मू-कश्मीर के शांत और सुंदर क्षेत्र पहलगाम को अपना निशाना बनाया था। इस जघन्य हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों ने अपनी जान गंवाई थी। आज उन बिछड़े हुए लोगों की याद में पूरा देश एकजुट है।
राष्ट्रपति मुर्मु: शांति और एकता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। उन्होंने रेखांकित किया कि हिंसा के ऐसे कृत्य भारत की सांस्कृतिक एकता और शांति की राह में अवरोध नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी हमारी सामूहिक स्मृति का हिस्सा है और पूरा राष्ट्र शोक संतप्त परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
गृह मंत्री अमित शाह: ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अडिग
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़े शब्दों में आतंकवाद के संरक्षकों को चेतावनी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी ‘कतई बर्दाश्त न करने’ (Zero Tolerance) की नीति पर कायम रहेगा।
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मानवता का शत्रु: अमित शाह ने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
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अटूट नीति: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत न केवल आतंकवाद, बल्कि उसे पनाह देने वाली ताकतों को भी जड़ से मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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जन-जन की पीड़ा: अपनों को खोने का दुख आज भी हर भारतीय के हृदय में जीवित है, और यही पीड़ा हमें इस बुराई के खिलाफ लड़ने की शक्ति देती है।
निष्कर्ष: संकल्पित भारत, सुरक्षित भारत
पहलगाम हमले की बरसी पर देश का यह एकीकृत स्वर केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं है; यह एक नई सैन्य और रणनीतिक दृढ़ता का परिचायक है। भारत ने आज यह सिद्ध कर दिया है कि वह शांति का पुजारी अवश्य है, किंतु अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कठोरतम कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।



