यमुना एक्सप्रेसवे पर ‘नया हाथरस’ शहर बसाने की तैयारी, जानिए कितने गांवों का होगा अधिग्रहण

यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे 4000 हेक्टेयर भूमि पर हाथरस अर्बन सेंटर यानि ‘नया हाथरस’ विकसित करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नए हाथरस शहर में स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान मिलेगी। इसके लिए कंपनी का चयन कर लिया गया है। कंपनी नौ महीने में मास्टर प्लान तैयार करेगी।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अधिकारी ने बताया कि हाथरस अर्बन सेंटर (नया हाथरस) के लिए मास्टर प्लान का खाका तैयार करने के लिए तेलंगाना की कंपनी आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड का चयन किया गया था। पिछले सप्ताह कंपनी की टीम में शामिल नौ प्रतिनिधिमंडलों के साथ यीडा अफसरों ने बैठक की थी।
20 वर्ष की योजना होगी तैयार
कंपनी प्रथम चरण में 4,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल का मास्टर प्लान तैयार करेगी, इस क्षेत्र में करीब 66 गांव आ रहे हैं। कंपनी ने नौ माह में मास्टर प्लान 2041 के तहत हाथरस के विकास को ध्यान में रखकर 20 वर्ष की योजना तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। अब सोमवार को भी कंपनी के साथ बैठक होगी, जिसमें पूरी योजना पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। बताया गया कि यह योजना जीआईएस तकनीक पर आधारित होगी और इसमें औद्योगिक विकास, जनसंख्या अनुमान, बुनियादी ढांचा, प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा।
ब्रिटिश काल में बड़ा व्यापारिक केंद्र रहा
उत्तर प्रदेश का हाथरस जिला अलीगढ़ और आगरा से सटा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से हाथरस ब्रिटिश काल में एक बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र रहा था। हालांकि, समय बीतने के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर एवं सुविधाओं के अभाव में इसका महत्व घट गया। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में हाथरस जिले में लघु और मझले उद्योग हैं। जिले में लगभग 10,293 उद्योग पंजीकृत हैं।
66 गांवों की जमीन पर बसाया जाएगा
यीडा के अधिसूचित क्षेत्र में हाथरस के कुल 358 गांव शामिल हैं। फिलहाल 66 गांवों की जमीन पर नया शहर बसाने की योजना पर काम चल रहा है। हाथरस में अलीगढ़ और आगरा के मुकाबले बेहतर सड़क संपर्क है। नए शहर का एनएच-93 और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिये एसएच-33 से जुड़ाव है। हाथरस (जंक्शन) पर दो रेल लाइनें मिलती है। हालांकि, कुछ कमजोरियां भी हैं। यहां पर आंतरिक सड़कों का अभाव है। पर्याप्त बिजली, जल आपूर्ति, सीवरेज की कमी है। स्वास्थ्य सेवाओं और मनोरंजन की सुविधाओं का अभाव है।
शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ यीडा, ”सोमवार को कंपनी पदाधिकारियों के साथ बैठक होगी, इसमें कंपनी शहर की निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें करीब नौ माह का समय लगेगा।”


