राष्ट्रिय

मणिपुर में दो समुदायों के ग्रामीण स्वयंसेवकों के बीच गोलीबारी, एक की मौत, तीन घायल

मणिपुर में करीब एक साल से हिंसा का दौर जारी है. अब मणिपुर के कोबरू में हिंसा का मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक कुबरू हिल रेंज एरिया में कुकी समुदाय के एक ग्राम स्वयंसेवक की झड़प में मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए हैं.

कांगपोकपी के कोबरू में हिंसा रविवार तड़के करीब 2:35 बजे लीमाखोंग-कांगचुप क्षेत्र के संवेदनशील इलाके में गोलीबारी हुई. इसके बाद हिंसा का दौर शुरू हो गया. सशस्त्र उपद्रवियों के बीच हिंसा के बाद कम्युनिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) ने पूरे सदर हिल्स कांगपोकपी जिले में 28 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से आधी रात तक 12 घंटे का पूर्ण बंद का ऐलान किया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पुलिस ने बताया कि रविवार सुबह दर्जनों बंदूकधारियों ने पड़ोसी कांगपोकपी जिले की ऊंची पहाड़ियों से इंफाल पश्चिम जिले के कौट्रुक पर हमला किया था, जिसके बाद सीमावर्ती गांव में तैनात स्वयंसेवकों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. उन्होंने बताया कि ये हिंसा धीरे-धीरे निकटवर्ती कडांगबंद और सेनजाम चिरांग गांवों तक फैल गई.

यह झड़पें शनिवार की सुबह मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना इलाके में सशस्त्र उपद्रवियों के हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो जवानों के शहीद होने के बाद शुरू हुई. पुलिस ने बताया कि घटना आधी रात से 2:15 बजे के बीच हुई. सशस्त्र समूहों ने सीआरपीएप कर्मियों पर बम फेंका, जो बाद में सुरक्षा बलों की चौकी के अंदर फट गया. शहीद की पहचान सीआरपीएफ के उप-निरीक्षक एन सरकार और हेड कांस्टेबल अरूप सैनी के रूप में की गई.

पिछले साल 3 मई को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से कौट्रुक गांव दो समुदायों के बीच हिंसा का गवाह रहा है.  पिछले साल 3 मई से इंफाल घाटी स्थित मैतेई और निकटवर्ती पहाड़ियों पर स्थित कुकियों के बीच जातीय संघर्ष में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

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