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पौड़ी गढ़वाल सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को झटका, बीजेपी उम्मीदवार अनिल बलूनी की शिकायत पर EC का एक्शन

उत्तराखंड में गढ़वाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है। जिला निर्वाचन अधिकारी पौड़ी व आरओ गढ़वाल सीट डा. आशीष चौहान ने नोटिस पर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। उन्होंने निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

गढ़वाल लोकसभा सीट से भाजपा के मुख्य निर्वाचन अभिकर्ता (चीफ इलेक्शन एजेंट) जगत किशोर बड़थ्वाल ने जिला निर्वाचन विभाग पौड़ी को आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर एक शिकायत सौंपी। शिकायती पत्र में बड़थ्वाल ने बताया कि बीते 12 अप्रैल को कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल ने अपने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर वीडियो जारी किया। जिसमें बताया गया कि एक प्लांट से शराब पकड़ी गई है। वह चुनाव में बांटने के लिए लाई गई थी।

वीडियो में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ तथ्यहीन दुष्प्रचार किया। कहा कि सतपुली के समीप बोटलिंग प्लांट बीते जनवरी 2024 में सील हो गया था। वह प्लांट सरकार के नियंत्रण में है।

आरोप लगाया कि गोदियाल ने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ सारे तथ्यहीन व निराधार आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा यह भाजपा प्रत्याशी की राजनीतिक छवि को धूमिल करने का षडयंत्र है। साथ ही यह उनके चुनाव प्रचार को प्रभावित करने का प्रयास है। मुख्य निर्वाचन अभिकर्ता बड़थ्वाल ने कांग्रेस प्रत्याशी के सोशल मीडिया से तत्काल वीडियो हटाए जाने के साथ ही दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाए जाने की मांग की।

जिला निर्वाचन अधिकारी पौड़ी व आरओ गढ़वाल सीट डा. आशीष चौहान ने कहा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी है। कांग्रेस प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी व सरकारी तंत्र से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ बिना तथ्यों के बयान प्रसारित किया है। गोदियाल का यह बयान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसलिए उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है।

मैं शिकायत न करता तो मामले में कार्रवाई नहीं होती : गोदियाल

कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल ने नोटिस को लेकर कहा कि चुनाव आयोग का नोटिस मिलीभगत है। आयोग ने मुझे इस रूप में नोटिस जारी किया कि मैंने साढ़े नौ हजार पेटी शराब की पकड़वाई है। जो शराब पकड़ी गई, मुझसे उसके बारे में तथ्य क्या है पूछा गया है। प्रशासन से पूछना चाहता हूं कि बंद पड़ी फैक्टरी में मिली साढ़े नौ हजार पेटी शराब किसकी है? वहां स्टॉक रजिस्टर को मेंटेन क्यों नहीं किया गया? स्टॉक रजिस्टर को आबकारी विभाग द्वारा कब्जे में क्यों नहीं लिया गया? सुबह ही जब मामला अधिकारियों की संज्ञान में लाया गया, तो रात तक अधिकारी फैक्टरी में क्यों नहीं पहुंचे? मुझे गढ़वाल लोस के पर्यवेक्षक तक को शिकायत करनी पड़ी। मामले में कोई कार्रवाई करने तक तैयार नहीं था। मैं नोटिस की चिंता नहीं करता। हमारा अंदेशा है कि भाजपा चुनाव में वह शराब बांटने के लिए लाई थी। अब सरकार बताएगी यह सच है या झूठ है।

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